सौंफ के औषधीय प्रयोग
Medicinal Use of Aniseed/ Fennel
वैज्ञानिक नाम : Foeniculum Vulgare
सौंफ से तो आपलोग भली भांति परिचित ही होंगे। पाचन—क्रिया पर अपना खास प्रभाव डालने के कारण यह प्रत्येक घर में व्यावहारिक रूप से प्रयोग किया जाता है।
आज हम आपको इसके साथ—साथ सौंफ के और भी अनेकों गुणों से परिचय करायेंगे जो न केवल आपको आश्चर्यचकित करेंगे बल्कि दैनिक जीवन में आपके लिए बहुत उपयोगी भी साबित होंगे।
दैनिक जीवन में लाभकारी सौंफ के गुण :
1. पाचन क्रिया में — सर्वप्रथम हम आपको सौंफ के पाचन—क्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताते हैं। सौंफ पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम के स्राव में गति प्रदान करता है। इसे खाने से पाचन क्रिया सुचारू रूप से होती है और भूख भी लगती है।
यदि बच्चों को अपच की समस्या हो तो एक कप पानी में 1 चम्मच सौंफ डालकर उबाल लें। इसे छानकर थोड़ी—थोड़ी देर पर बच्चे को दें।
यदि बच्चे का पेट फूलता हो तो एक गिलास पानी में 1 चम्मच सौंफ डालकर रात भर के लिए भिंगो कर छोड़ दें। सुबह इस पानी को दूध में मिलाकर पिलाने से बच्चों के पेट दर्द, पेट फूलना, गैस आदि की समस्या दूर हो जाती है।
2. नेत्र विकार में — सौंफ को पीसकर चूर्ण बना लें। अब आधा चम्मच मिश्री का चूर्ण मिलाकर रात को सोते समय दूध के साथ लें। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है।
यदि आंख आने की समस्या हो तो सौंफ को पानी में डाल कर उबाल लें। पानी छानकर इसका सेवन करें और इसी पानी से आंख बंद रखकर धोयें। इससे आंखों के जलन में राहत मिलेगी और आंख जल्दी ठीक होगी।
3. हृदय रोग में — सौंफ में फायबर की पचुरता होती है जो कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने में सहायक होते हैं। भोजन के पश्चात नियमित रूप से सौंफ के चबा—चबा कर खाने से हर्ट—अटैक का खतरा नहीं रहता है।
4. ब्लड—प्रेशर के नियंत्रण में — सौंफ में उपस्थित पोटैशियम शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
5. नाभि खिसकने में — पिसी हुई सौंफ को गुड़ में मिलाकर गोली बना लें। इस गोली का सुबह—शाम सेवन करने से नाभि खिसकने की समस्या दूर हो जाती है।
6. सुडौल स्तन — सौंफ में फ्ल्वोनोइड्स पाया जाता है जो एस्ट्रोजेन नामक हार्मोन को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके कारण स्तन में नए शेल का निर्माण तीव्र हो जाता है और स्तन का आकार बढ़ने लगता है। इससे स्तन सुडौल होते हैं।
7. पेशाब की जलन में — सौंफ के सेवन से पेशाब में होने वाले जलन से भी निजात मिलती है। यह अन्य मूत्र—विकारों को भी दूर करता है।
8. दस्त की समस्या में — यदि आपको आंव वाले दस्त की समस्या है तो आप 50 ग्राम सौंफ को भून लें और इतने ही बिना भुने हुए सौंफ और 100 ग्राम मिश्री मिलाकर इसका चूर्ण तैयार कर लें। अब इस चूर्ण का 2 चम्मच पानी के साथ 3—4 घण्टे के अंतराल पर लें। राहत मिलेगी।
9. स्मरण शक्ति बढ़ाने में — समान मात्रा में सौंफ, बादाम और मिश्री को पीसकर चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण का आधा चम्मच रात को सोते समय गर्म दूध के साथ लें। इससे स्मरण शक्ति तीव्र होती है।
10. गर्भावस्था में — यदि गर्भावस्था में अधिक उल्टियां आती है, तो 100 ग्राम सौंफ को आधा लीटर दूध में अच्छी तरह उबाल लें अब इसे छानकर स्वादानुसार चीनी मिलाकर हर 2—3 घण्टे पर पिलाने से उल्टी बंद हो जाएंगी।
11. सुस्ती दूर करने में — 100 ग्राम सौंफ को आधा लीटर पानी में तब तक उबालें जब तक कि पानी एक चौथाई न रह जाए। अब इसमें हल्का नमक मिलाकर सुबह—शाम थोड़ा—थोड़ा पिलाएं। नींद कम आएगी और शरीर एक्टिव रहेगा।
12. दांतो की चमक लाने में — सौंफ को हल्का भून कर इसे पीस कर पाउडर बना लें। अब इस पाउडर से दांतों की मालिश करें। दांतों की चमक वापस आएगी।
मुंह के बदबू को दूर रखने के लिए खाने के बाद सौंफ चबायें।
सामान्यतया आयुर्वेदिक औषधियों का कोई साईड इफेक्ट नहीं होता है। फिर भी उपयोगकर्ता को सलाह दी जाती है कि किसी भी नुस्खे का प्रयोग करने से पहले पूरी सावधानी बरतें और श्रेष्ठ जनों अथवा आवश्यक होने पर अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
No comments:
Post a Comment