Name of the Disease :
Acidity
बीमारी का
नाम :
एसिडिटी
Short Description of
Acidity
एसिडिटी
की
संक्षिप्त
जानकारी
एसिडिटी या
पेट में जलन
महसूस होना
एक आम समस्या
है। इसमें
मुख्य रूप से
छाती या सीने
में जलन
महसूस होती
है।
चिकित्सकीय
भाषा में इसे
गैस्ट्रोइसोफेजियल
रिफलक्स
डिजीज (GERD) के
नाम से जाना
जाता है।
जबकि
आयुर्वेद
में इसे अम्ल
पित्त कहा
जाता है।
Symptoms of
Acidity
एसिडिटी
के लक्षण
एसिडिटी का
प्रमुख
लक्षण है
रोगी के सीने
या छाती में
जलन। अनेक
बार एसिडिटी
की वजह से
सीने में
दर्द भी रहता
है, मुंह में
खट्टा पानी
आता है।
एसिडिटी के
कारण कई बार
रोगी ऐसा
महसूस करता
है जैसे भोजन
उसके गले में
आ रहा है या कई
बार डकार के
साथ खाना
मुँह में आ
जाता है। रात
में सोते समय
इस तरह की
शिकायत अधिक
होती है। कई
बार एसिड
भोजन नली से
सांस की नली
में भी पहुंच
जाता है,
जिससे मरीज
को दमा या
खांसी की
तकलीफ भी हो
सकती है।
कभी-कभी मुंह
में खट्टे
पानी के साथ
खून भी आ सकता
है।
अन्य
लक्षणों में -
उलटी, पेट
फूलना,
लगातार सूखी
खांसी आना,
घरघराहट, गले
की समस्याएं
जैसे कि गले
में खराश
होना, छाती या
ऊपरी पेट में
दर्द, काला मल,
लगातार
हिचकी आना,
बिना किसी
कारण के वजन
घटना आदि भी
एसिडिटी के
लक्षण हो
सकते हैं।
Cause of
Acidity
एसिडिटी
का कारण
आमाशय में
पाचन क्रिया
के लिए
हाइड्रोक्लोरिक
अम्ल तथा
पेप्सिन का
स्राव होता
है। सामान्य
तौर पर यह
अम्ल तथा
पेप्सिन,
आमाशय में ही
रहता है तथा
भोजन नली के
सम्पर्क में
नहीं आता है।
आमाशय तथा
भोजन नली के
जोड पर विशेष
प्रकार की
मांसपेशियां
होती है जो
अपनी
संकुचनशीलता
से आमाशय एवं
आहार नली का
रास्ता बंद
रखती है तथा
कुछ
खाते-पीते ही
खुलती है। जब
इनमें कोई
विकृति आ
जाती है तो कई
बार अपने आप
खुल जाती है
और एसिड तथा
पेप्सिन
भोजन नली में
आ जाता है। जब
ऐसा बार-बार
होता है तो
आहार नली में
सूजन तथा घाव
हो जाते हैं।
तले हुए खाने
का अधिक सेवन
भी एसिडिटी
का कारण हो
सकती है। तला
हुआ खाना
पचने में
अधिक समय
लगाता है और
पेट में अधिक
देर तक रहता
है। ऐसा
इसलिए होता
है, क्योंकि
वसा भोजन को
आंतों तक
जाने की गति
को धीमा कर
देती है।
इससे पेट में
एसिड बनने
लगता है और
एसिडिटी हो
जाती है।
Treatment of
Acidity
एसिडिटी
का उपचार
अपनी
रोजमर्रा की
दिनचर्या
में थोड़ी सी
बदलाव लाकर
एसिडिटी पर
काबू पाया जा
सकता है।
एसिडिटी
रोकने के लिए
निम्नलिखित
उपाय अपनाए
जा सकते हैं-
अधिक से अधिक
फल और हरे
सब्जियों का
सेवन करें।
एक बार में ही
अधिक खाने की
बजाए,
थोड़ा-थोड़ा
भोजन कई बार
करें।
रात को सोने
से करीब 1 घंटे
पहले भोजन
करें और भोजन
के पश्चात
कुछ कदम
अवश्य
चलें। कहा
गया है भोजन
के पश्चात
आपका 100 कदम
चलना सौ
बीमारियों
को दूर रखता
है।
खाना खाने से
आधे घंटे
पहले और खाना
खाने के 1 घंटे
बाद तक पानी
ना पीयें।
नियमित
व्यायाम
करें।
परहेज /
Precautions
चाय, कॉफी,
शराब आदि का
सेवन
नुकसानदायक
हो सकता है।
ड्राई
फ्रूट्स और
खट्टी चीजों
से भी परहेज
करें।

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